इक्फ़ाई विश्वविद्यालय में डिजिटल कृषि प्रबंधन पर पैनल चर्चा क आयोजन



इक्फ़ाई विश्वविद्यालय, झारखंड में “डिजिटल कृषि प्रबंधन – अवसर और चुनौतियां” पर एक पैनल चर्चा की गई। इस पैनल चर्चा में डॉ। डीके श्रीवास्तव (आईएफ़एस), झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड सरकार के प्रधान संरक्षक, श्री प्रदीप हजारी, विशेष सचिव सह सलाहकार, कृषि विभाग, पशुपालन और सहकारिता, झारखंड सरकार और श्री कौशल कुमार सिन्हा, पूर्व सीजीएम, नाबार्ड के लोग शामिल थे।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो ओ आर एस राव ने प्रतिभागियों को पैनल चर्चा में स्वागत करते हुए कहा की  पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की और वही इसे निर्यात करने में भी सक्षम है। सरकार, हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने के लिए 10,000 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-एनएएम) स्थापित करने जैसी कई पहल की है। हालांकि, इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईओटी, सैटेलाइट इमेज प्रोसेसिंग की बेहतर तैनाती से किसानों की आय को और बेहतर बना ने में मदद मिल सकती है। आज की पैनल चर्चा का उद्देश्य इसी तरह के टेक्नोलॉजीज के कार्यान्वयन में अवसरों और चुनौतियों की पहचान करना है।

पैनल चर्चा को संबोधित करते हुये डॉ। डी के श्रीवास्तव ने दीर्घकालिक कृषि की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, जिसमें वायु, जल और खाद्य सुरक्षा को संरक्षित किया जाना है। उन्होंने कृषि और वन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया। उन्होने कहा की सटीक खेती की अवधारणाओं और सैटेलाइट इमेजरी को कृषि से जोड़ने के लिए इनपुट का बड़ा डेटा बेस बनाया गया है, जिसका उपयोग फसल चयन, कटाई आदि के लिए किया जा सकता है ताकि उपज और उत्पादकता में वृद्धि हो सके।

श्री प्रदीप हजारी ने खेती में मोबाइल एप्लिकेशन, हाथ से संचालित उपकरणों की तकनीक जैसी आसान तकनीकों को पेश करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे डिजिटल तकनीक उत्पादकों और बाजारों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है ताकि मूल्य की वास्तविकताओं को बढ़ाया जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि डेयरी फार्मिंग के मार्केट मॉडल का अध्ययन, कृषि खेती में उनकी अच्छी तरीको की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कृषि-संबंधित संगठनों जैसे कृषि विस्तार, कृषि-इनपुट प्रदाताओं, कृषि-वित्तपोषण, खुदरा बिक्री, सरकार आदि में वर्तमान कर्मचारियों की अप-स्किलिंग और री-स्किल्लिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, ताकि कृषि-प्रबंधन के डिजिटल परिवर्तन को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

सुझाव का जवाब देते हुए, प्रोफेसर ओ आर एस राव ने बताया कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों को अपस्किल और री-स्किलल  के लिए डिजिटल कृषि प्रबंधन में 2 महीने का प्रमाणपत्र कार्यक्रम शुरू कर रहा है। कार्यक्रम 7 मार्च 2021 को शुरू होगा और आवेदन की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2021 है। प्रो राव ने कहा की अधिक जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।

प्रोफेसर कौशल कुमार सिन्हा ने सर्टिफिकेट प्रोग्राम की पेशकश करने के लिए विश्वविद्यालय की पहल की सराहना की, जो कृषि से जुड़े संगठनों में काम करने वाले पेशेवरों को अपने करियर बनाने और बढ़ाने में मदद कर सकता है।

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